सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय (Subhadra Kumari Chauhan Biography In Hindi)

सुभद्रा कुमारी चौहान राष्ट्रीय कवयित्री रही थी। वे एक रचनाकार होने के साथ-साथ वह भी आजादी की लड़ाई की एक फाइटर भी रही थी, Google ने INDIA की पहली महिला सत्याग्रही सुभद्रा कुमारी चौहान को उनकी 117वीं जन्मदिन पर 16 अगस्त को एक विशेष ग्राफिक्स के साथ सम्मानित किया गया हैं। सुभद्रा कुमारी चौहान एक बुहार बड़ी लेखिका और फ्रीडम फाइटर थीं,सुभद्रा की राष्ट्रवादी कविता झाँसी की रानी को हिंदी लिटरेचर  में सबसे जायदा पढ़ी जाने वाली कविताओं में से एक माना जाता है। वह लगातार लिखने के लिए जानी जाती थी, यहां तक कि स्कूल के रास्ते पर घोड़ा गाड़ी में लगातार लिखती रहती थी, और उसकी पहली कविता केवल 9 वर्ष की उम्र में पब्लिश हुई थी।

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म कब और कहां हुआ था?

इनका जन्म 16 अगस्त 1904 मै उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के नागपंचमी के दिन इलाहाबाद के नज़दीक ही निहालपुर नाम के एक गाँव मे  रामनाथ सिंह के जमींदार एक राजपूत परिवार में हुआ था! उन्होंने शुरू में प्रयागराज में (Crosthwaite Girls’ School) और 1919 मै middle school का परीक्षा पास की और उसी साल 1919 में खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से शादी की।जब वह 16 साल की थीं, खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह से उनके पांच बच्चे थे। उसी वर्ष खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ उसकी शादी के बाद वह जुबुलपुर (अब जबलपुर) चाले गए।

सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परीचए।

1919 में खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान से शादी की। जब वह 16 साल की थीं, खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह से उनके पांच बच्चे(सुधा चौहान, अजय चौहान, ममता चौहान, विजय चौहान, अशोक चौहान)हैं। उसी वर्ष खंडवा के ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान के साथ उसकी शादी के बाद वह जुबुलपुर (अब जबलपुर) चाले गए।1941 में सुभद्रा कुमारी चौहान और उनके पति ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। वह नागपुर में गिरफ्तार हुए और कैद होने वाली सबसे पहली महिला सत्याग्रही थीं वह राज्य की विधान सभा (erstwhile Central Provinces) की मेंबर भी रही थीं।

 सुभद्रा कुमारी चौहान की जीवनी, इनकी पुत्री, सुधा चौहान ने मिला तेज से तेज’ नामक पुस्तक में लिखी हुए है। इसे हंस प्रकाशन, इलाहाबाद ने पब्लिश किया गया है।

सुभद्रा कुमारी चौहान की काव्यगत विशेषताएँ और उनका साहित्यिक परिचय।

सुभद्रा कुमारी चौहान ने हिंदी कविता में कई प्रसिद्ध रचनाएँ लिखीं हुए हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध और मन-पसंद कृति झाँसी की रानी है, जो रानी लक्ष्मी बाई के जीवन का वर्णन करने वाली भावक रूप से बहुत महत्वपूर्ण कविता है यह कविता (Hindi Literature)हिंदी साहित्य में सबसे जायदा  पढ़ी जाने वाली और गाई जाने वाली कविताओं में से एक  है।झांसी (British INDIA) की रानी के जीवन और (Revolution of 1857) 1857 की क्रांति में उनकी भागीदारी का बहुत बेहतरीन रूप से चर्चा किया गया हैं, इस लोकप्रिय कविता को अक्सर भारत के स्कूलों में पढ़ाया जाता है प्रत्येक छंद के अंत में दोहराया गया एक दोहा कुछ इस प्रकार पढ़ता जाता है:

     ” बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,                                      खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी”

            सुभद्रा कुमारी चौहान की और भी बहुत सी कविताएँ,

 जलियाँवाला बाग में वसंत। 

वीरों का कैसा हो बसंत

 राखी की चुनौती।

, और विदा स्वतंत्रता आंदोलन 

के बारे में खुलकर बात करते हुए लिखी हैं। कहा जाता है कि उन्होंने बड़ी गिनती में भारतीय युवाओं को भारतीय स्वतंत्रता अभियान में भाग लेने के लिए इंस्पायर किया हुआ हैं।    

आईसीजीएस सुभद्रा कुमारी चौहान एक  (INDIAN Coast Guard) जहाज का नाम कवि के नाम पर रखा गया था, मध्य प्रदेश सरकार ने जबलपुर के (municipal office) के सामने सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रतिमा लगाई हुए हैं। 16 अगस्त 2021 को (Search Engine Google) सर्च इंजन गूगल ने सुभद्रा कुमारी को उनकी 117वीं (Birth anniversary), चौहान की कविता ऐतिहासिक रूप मै बहुत से भारतीय स्कूलों मै पढ़ाई जाती हैं जो आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक अन्याय के खिलाफ खड़े होने मै हौसला देती हैं और उनका अनोबल भड़ाई जायेगी। 

सुभद्रा कुमारी चौहान की मृत्यु कब हुई।    

सुभद्रा कुमारी चौहान की मृत्यु 1948 मै एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इनका  नागपुर से जबलपुर वापस जाते समय मध्य प्रदेश(UP) के सिवनी के पास एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

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